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Navratri 2026 Puja Vidhi, Samagri, Bhog List Live Updates: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इस विधि और मुहूर्त में करें घटस्थापना, जानें मां शैलपुत्री पूजा मंत्र, चालीसा, स्त्रोत और दुर्गा जी की आरती

 Written By: Vineeta Mandal
 Updated : Mar 19, 2026 12:06 am IST

Chaitra Navratri 2026: देवी दुर्गा की उपासना के लिए नवरात्रि का समय अति उत्तम माना गया है। इस दौरान माता रानी के 9 अलग-अलग रूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। ऐसा करने से सुख-समृद्धि और संपन्नता में वृद्धि होती है।

चैत्र नवरात्रि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी- India TV Hindi
चैत्र नवरात्रि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी Image Source : INDIA TV

Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहा है, जिसका समापन 27 मार्च 2026 को होगा। चैत्र नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। नवरात्रि में मां भगवती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शारदीय नवरात्रि की तरह ही चैत्र नवरात्रि में विधि विधान और अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में नौ दिन व्रत करने का विधान है। साथ ही नवरात्रि के पहले दिन कलश या घटस्थापना भी किया जाता है। तो आइए जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि के दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। साथ ही जानेंगे पूजा विधि के बारे में।

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। प्रतिपदा तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। चैत्र नवरात्रि के दिन घटस्थापना के लिए मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से सुबह 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना अभिजित मुहूर्त 19 मार्च को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना (घटस्थापना) विधि 

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद घर और मंदिर हर जगह गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। घर की उत्तर-पूर्व दिशा या मंदिर कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी का पात्र लें और उसमें मिट्टी डालकर जौ बोएं। फिर तांबे या मिट्टी का कलश लें और उसके मुख पर कलावा बांध लें। फिर उसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें।  कलश में 5 आम के पत्ते चारों तरफ से रखें। आम की जगह अशोक के पत्ते भी रख सकते हैं। कलश के ऊपर एक जटा वाला नारियल रखें। नारियल पर कलावा बांधकर ही कलश पर रखें। या फिर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर भी रख सकते हैं। इसके बाद कलश की विधि विधान पूजा करें। फिर हाथ में जल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। नवरात्रि के  नौ दिनों तक देवी दुर्गा के साथ-साथ कलश की भी पूजा करें।

(चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि, भोग, मंत्र, कथा, आरती, उपाय, नौ दिन के रंग समेत सभी जरूरी जानकारी के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर)

Live updates :Chaitra Navratri 2026 Live Updates

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  • 11:59 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Maa Shailputri Aarti: मां शैलपुत्री जी की आरती

    शैलपुत्री माँ बैल असवार। करें देवता जय जय कार॥
    शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
    पार्वती तू उमा कहलावें। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें॥
    रिद्धि सिद्धि प्रदान करे तू। दया करें धनवान करें तू॥
    सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी॥
    उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥
    घी का सुन्दर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥
    श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥
    जय गिरराज किशोरी अम्बे। शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥
    मनोकामना पूर्ण कर दो। चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥

  • 11:58 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri 2026 1st Day: चैत्र नवरात्रि- प्रथम दिन- मां शैलपुत्री

    मंत्र-

    1. ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
    2. या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    3. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

    स्तोत्रम्

    प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।
    धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
    त्रिलोजननी त्वंहि परमानन्द प्रदीयमान्।
    सौभाग्यरोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
    चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह विनाशिनीं।
    मुक्ति भुक्ति दायिनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

  • 11:46 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    मां दुर्गा जी की आरती (Maa Durga Ji Ki Aarti)

    जय अम्बे गौरी,
    मैया जय श्यामा गौरी ।
    तुमको निशदिन ध्यावत,
    हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    मांग सिंदूर विराजत,
    टीको मृगमद को ।
    उज्ज्वल से दोउ नैना,
    चंद्रवदन नीको ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    कनक समान कलेवर,
    रक्ताम्बर राजै ।
    रक्तपुष्प गल माला,
    कंठन पर साजै ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    केहरि वाहन राजत,
    खड्ग खप्पर धारी ।
    सुर-नर-मुनिजन सेवत,
    तिनके दुखहारी ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    कानन कुण्डल शोभित,
    नासाग्रे मोती ।
    कोटिक चंद्र दिवाकर,
    सम राजत ज्योती ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    शुंभ-निशुंभ बिदारे,
    महिषासुर घाती ।
    धूम्र विलोचन नैना,
    निशदिन मदमाती ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    चण्ड-मुण्ड संहारे,
    शोणित बीज हरे ।
    मधु-कैटभ दोउ मारे,
    सुर भयहीन करे ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    ब्रह्माणी, रूद्राणी,
    तुम कमला रानी ।
    आगम निगम बखानी,
    तुम शिव पटरानी ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
    नृत्य करत भैरों ।
    बाजत ताल मृदंगा,
    अरू बाजत डमरू ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    तुम ही जग की माता,
    तुम ही हो भरता,
    भक्तन की दुख हरता ।
    सुख संपति करता ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    भुजा चार अति शोभित,
    वर मुद्रा धारी । 
    मनवांछित फल पावत,
    सेवत नर नारी ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    कंचन थाल विराजत,
    अगर कपूर बाती ।
    श्रीमालकेतु में राजत,
    कोटि रतन ज्योती ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    श्री अंबेजी की आरति,
    जो कोइ नर गावे ।
    कहत शिवानंद स्वामी,
    सुख-संपति पावे ॥
    ॐ जय अम्बे गौरी..॥
    जय अम्बे गौरी,
    मैया जय श्यामा गौरी ।

  • 11:39 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    इस दिशा में करें घटस्थापना

    ईशान कोण अर्थात् उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना जाता है, इसलिए माता की प्रतिमा और घटस्थापना इसी दिशा में करना शुभ होता है।

  • 11:32 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri 2026 Durga Chalisa: श्री दुर्गा चालीसा

    ॥ चौपाई ॥
    नमो नमो दुर्गे सुख करनी।नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

    निराकार है ज्योति तुम्हारी।तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

    शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

    रूप मातु को अधिक सुहावे।दरश करत जन अति सुख पावे॥

    तुम संसार शक्ति लय कीना।पालन हेतु अन्न धन दीना॥

    अन्नपूर्णा हुई जग पाला।तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

    प्रलयकाल सब नाशन हारी।तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

    शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

    रूप सरस्वती को तुम धारा।दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा॥

    धरा रूप नरसिंह को अम्बा।प्रगट भईं फाड़कर खम्बा॥

    रक्षा कर प्रह्लाद बचायो।हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

    लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।श्री नारायण अंग समाहीं॥

    क्षीरसिन्धु में करत विलासा।दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

    हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।महिमा अमित न जात बखानी॥

    मातंगी अरु धूमावति माता।भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

    श्री भैरव तारा जग तारिणी।छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

    केहरि वाहन सोह भवानी।लांगुर वीर चलत अगवानी॥

    कर में खप्पर-खड्ग विराजै।जाको देख काल डर भाजे॥

    सोहै अस्त्र और त्रिशूला।जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

    नगर कोटि में तुम्हीं विराजत।तिहुंलोक में डंका बाजत॥

    शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।रक्तबीज शंखन संहारे॥

    महिषासुर नृप अति अभिमानी।जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

    रूप कराल कालिका धारा।सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

    परी गाढ़ सन्तन पर जब-जब।भई सहाय मातु तुम तब तब॥

    अमरपुरी अरु बासव लोका।तब महिमा सब रहें अशोका॥

    ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

    प्रेम भक्ति से जो यश गावै।दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

    जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

    शंकर आचारज तप कीनो।काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

    शक्ति रूप को मरम न पायो।शक्ति गई तब मन पछितायो॥

    शरणागत हुई कीर्ति बखानी।जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

    भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

    मोको मातु कष्ट अति घेरो।तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

    आशा तृष्णा निपट सतावे।मोह मदादिक सब विनशावै॥

    शत्रु नाश कीजै महारानी।सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

    करो कृपा हे मातु दयाला।ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥

    जब लगि जियउं दया फल पाऊं।तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥

    दुर्गा चालीसा जो नित गावै।सब सुख भोग परमपद पावै॥

    देवीदास शरण निज जानी।करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

  • 11:06 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    नवरात्रि में जौ बोने की पौराणिक कथा

    पौराणिक कथा के मुताबिक, जब धरती पर दैत्य-असुरों का अत्याचार बढ़ गया था तब मां दुर्गा ने उनका संहार कर मानव जाति के जीवन की रक्षा की। कहा जाता है कि देवी दुर्गा और दैत्यों के संघर्ष के दौरान पृथ्वीलोक पर भयंकर अकाल पैदा हो गया था, चारों तरफ सूखा ही सूखा था। मां अंबे के द्वारा दैत्यों के संहार के बाद जब धरती फिर से हरी-भरी हुई, तब सबसे पहले जौ उगे, इसलिए जौ को समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।

    दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की तब जो फसल सबसे पहले विकसित हुई थी वो जौ थी। कहते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा की जाती है और उसे कलश में भी स्थापित किया जाता है। नवरात्रि के समय जौ बोने की परंपरा धरती पर संपन्नता का संदेश देती है।

  • 11:06 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    नवरात्रि में जौ बोने का महत्व

    नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही जौ बोने की भी परंपरा है। मान्यता है कि जौ बोने से घर में समृद्धि और संपन्नता आती है।

  • 10:50 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri 2026 First Day: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करें

    चैत्र नवरात्रि के पहले मां शैलपुत्री की उपासना की जाएगी। माता शैलपुत्री की पूजा करने से  व्यक्ति को धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम: मंत्र का जाप करें।

  • 10:18 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri Bhog List: चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी मां को क्या-क्या भोग लगाना चाहिए?

    1. नवरात्रि के पहले  दिन मां शैलपुत्री को दूध और घी से बनी सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं
    2. नवरात्रि के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को चीनी या गुड़ का भोग लगाएं।
    3. चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या मेवा से बनी चीजें अर्पित करें।
    4. चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाएं।
    5. चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केला का भोग लगाएं।
    6. चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी को शहद या मीठा पान अर्पित करें।
    7. चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं।
    8. चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को हलवा, खीर-पूड़ी और नारियल चढ़ाएं।
    9. चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री को चना और हलवे का भोग लगाएं।
  • 10:01 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    साल में कितनी बार नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है?

    वर्ष में चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ में कुल मिलाकर चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से चैत्र और अश्विन महीने के नवरात्रों को ही प्रमुखता से मनाया जाता है। माघ और आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि आती है, जिसमें तंत्र-मंत्र की साधना का विधान है। इसी वजह से आम या गृहस्थ लोगों गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व नहीं है।

  • 9:44 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    नवरात्रि में किस दिन कौनसी देवी की पूजा होती है?

    चैत्र नवरात्रि के पहला दिन- मां शैलपुत्री
    चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी
    चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा
    चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन- मां कूष्मांडा
    चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन- देवी स्कंदमाता
    चैत्र नवरात्रि का छठा दिन- मां कात्यायनी
    चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि
    चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन- मां महागौरी
    चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन- मां सिद्धिदात्री

  • 9:05 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    चैत्र नवरात्रि में इन नियमों का करें पालन

    नवरात्रि में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
    नवरात्रि के दौरान बाल, नाखून और दाढ़ी आदि नहीं काटना चाहिए
    नवरात्रि में सात्विक आहार ही खाएं 
    नवरात्रि में लाल, पीले, हरे और गुलाबी जैसे रंग के कपड़े पहनें
    नवरात्रि में किसी के लिए बुरे विचार अपने मन में न रखें
    अगर नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाई है तो उसे घर में गलती से भी खाली न छोड़ें

  • 8:41 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    चैत्र नवरात्रि में देवी मां का वाहन क्या संकेत दे रहा है?

    मां दुर्गा का वाहन सिंह यानी शेर है लेकिन नवरात्रि में जब माता रानी पृथ्वीलोक पर आती हैं तब उनकी सवारी बदल जाती है। देवी मां का अलग-अलग वाहन अशुभ और शुभता का प्रतीक होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि में देवी मां पालकी में बैठकर आ रही हैं जो कि शुभ संकेत नहीं है।  वहीं माता रानी हाथी पर बैठकर विदा होंगी जो कि शुभ संकेत है। यह सुख-समृद्धि और खुशहाली का संकेत होता है।

  • 8:41 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Mata Rani Ka Vahan: चैत्र नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी क्या है?

    इस साल चैत्र नवरात्रि में माता रानी पालकी पर सवार होकर आ रही हैं। वहीं देवी मां प्रस्थान हाथी पर बैठकर करेंगे। जब नवरात्रि का आरंभ गुरुवार, शुक्रवार के दिन होता है  दुर्गा मां की सवारी पालकी रहती है।  मां दुर्गा बुधवार और शुक्रवार के प्रस्थान करती हैं तब उनका वाहन हाथी होता है, जो कि बहुत ही शुभ होता है।

  • 8:16 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri Live: देवी मां को अर्पित करें श्रृंगार की चीजें

    लाल चुनरी, चूड़ी, बिछिया, पायल, माला, कान की बाली, नाक की नथ, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल, महावर या आलता, नेलपॉलिश, लिपस्टिक, इत्र आदि सुहाग की चीजें।

  • 7:38 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    घटस्थापना से जुड़ी जरूरी बातें

    घटस्थापना को कलशस्थापना के नाम से भी जाना जाता है। 
    रात्रिकाल में घटस्थापना करना वर्जित होता है। अशुभ समय में घटस्थापना करने से देवी मां की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।
    प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना हेतु सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। 
    अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।
    घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को टालने की सलाह दी जाती है लेकिन इन्हें वर्जित नहीं किया गया है। 

     

  • 7:31 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त

    प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - मार्च 19, 2026 को 06:52 ए एम बजे
    प्रतिपदा तिथि समाप्त - मार्च 20, 2026 को 04:52 ए एम बजे
    कलश स्थापना (घटस्थापना) मुहूर्त - 06:52 ए एम से 08:08 ए एम
    कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त - 12:22 पी एम से 01:11 पी एम

  • 6:44 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapna Mantra: कलश स्थापना मंत्र

    • ओम भूर्भुवः स्वः भो वरुण, इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण।
    • 'ओम अपां पतये वरुणाय नमः'
    • ओम धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्यो दानाय त्वा व्यानाय त्वा। दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि।।
    • ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।
    • ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।।
  • 6:08 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    कलश या घटस्थापना नियम

    • साफ-सुथरी जगह पर ही कलश स्थापित करें
    • कलश मिट्टी के अलावा चांदी या पीतल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
    • नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापना करें
    • कलश को ईशान कोण में ही स्थापित करें
    • कलश पर नारियल जरूर रखें और उसपर कलावा जरूर बांधें
    • पूरे नौ दिनों तक विधि विधान के साथ कलश की पूजा जरूर करें
    • कलश पर अक्षत और फूल अर्पित करें
    • कलश को शुद्ध हाथ और स्नान करने के बाद ही छुएं
    • कलश स्थापना करने के बाद इसे 9 दिनों तक बिल्कुल भी नहीं हिलाएं
    • कलश स्थापित करने के बाद इसके जगह में बदलाव नहीं कर सकते हैं
    • कलश की स्थापना करने के बाद उस कमरे को कभी भी खाली न छोड़ें वहां हमेशा कोई न कोई रहें
  • 5:04 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    घटस्थापना या कलश स्थापना पूजा सामग्री लिस्ट (Chaitra Navratri Ghatshthapna or Kalash Sthapana Puja Samagri List

    कलश (मिट्टी, तांबा या पीतल)
    गंगाजल 
    मौली
     रोली
    अक्षत
    सुपारी
     सिक्का
    आम के पत्ते का पल्लव (5 आम के पत्ते की डली)
     मिट्टी का बर्तन
    शुद्ध मिट्टी
    कलावा
    जौ
    पीतल या मिट्टी का दीपक
    घी
    रूई-बाती
    सिंदूर
    लाल चुनरी
    जटा वाला नारियल

  • 4:34 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    9 देवियों के नाम

    चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। देवी मां के 9 स्वरूपों के नाम है- शैलपुत्री,  ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा,  कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, मां कालरात्रि,  महागौरी, सिद्धदात्री।

  • 3:57 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    चैत्र नवरात्रि 2026

    चैत्र नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी या दशमी तिथि तक रहता है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और समाप्त 27 मार्च को होगा। 27 मार्च को ही चैत्र नवरात्रि का पारण किया जाएगा।

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